Tu hi Shiv hai

तू ही है, तू ही है…

हर ओर मुझमें ही तू…

तू ही शून्य, तू ही स्वर…

तू ही धरा, तू ही अंबर…

तू शिव है, तू ही शिव है…

चलते कदम, रुकते नहीं,

राहें सब तुझ में ही सही।

हर कण में बसी जो रौशनी,

वो तुझसे ही है जुड़ी।

तू ही सागर, तू ही लहर,

तू ही धूप, तू ही सहर।

ढूंढा जहाँ भी, पाया वही,

हर श्वास में है वही असर।

तू ही है, तू ही है…

हर ओर मुझमें ही तू…

तू ही शून्य, तू ही स्वर…

तू ही धरा, तू ही अंबर…

तू शिव है, तू ही शिव है…

तू ही ब्रह्म है, तू ही जीवन है,

हर धड़कन में तू ही स्पंदन है।

मिट्टी से नभ तक, शून्य से स्वर तक,

हर इक पल में बसा अनंत है।

खोया कहाँ, पाया कहाँ,

खुद को ही ढूंढे तेरी कथा।

सांसों की सरगम कह रही,

सब कुछ है तू, कुछ भी नहीं।

जब आँखें बंद हों, दिखे तू,

हर प्रश्न का उत्तर है तू।

माया के परे, सत्य के द्वारे,

एक ही धुन में बसा है तू।

तू ही राग है, तू ही मौन है,

तू ही छाया, तू ही कौन है।

जो भी गुज़रा, जो भी आए,

सब कुछ तुझमें ही समाए।

तू ही तू है, तू ही तू,

रहस्य गहरा, अजब जादू।

हवा की सरगम, जल का गीत,

हर एक रंग में तेरी प्रीत।

रात भी तू, उजास भी तू,

आग की तपिश, शीतल अहसास भी तू।

ढूँढा जितना, उतना खोएगा,

तेरा ही अक्स, मुझमें रोएगा।

तू ही ब्रह्म है, तू ही जीवन है,

हर धड़कन में तू ही स्पंदन है।

शब्दों से परे, धुनों में घुले,

हर इक पल में तू ही अनंत है।

तू ही है, तू ही है…

हर ओर मुझमें ही तू…

तू ही शून्य, तू ही स्वर…

तू ही धरा, तू ही अंबर…

तू शिव है, तू ही शिव है…

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Tu hi Shiv hai

Tu hi Shiv hai

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October 6, 2025

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तू ही है, तू ही है… हर ओर मुझमें ही तू… तू ही शून्य, तू ही स्वर… तू ही धरा, तू ही अंबर… तू शिव है, तू ही शिव है… चलते कदम, रुकते नहीं, राहें सब तुझ में ही सही। हर कण में…
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Hadtal Mrudung (हड़ताळ मृदंग ध्रगट ध्रगट)

Hadtal Mrudung (हड़ताळ मृदंग ध्रगट ध्रगट)

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October 2, 2025

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धक-धक धधक ध्वनि धूम्रधार

धक-धक धधक ध्वनि धूम्रधार

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October 2, 2025

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मसाने में होली खेलें

मसाने में होली खेलें

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October 1, 2025

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मसाने में होली खेलें मसाने में होली खेलें, शिव डमरू वाला,भूत-गणों की टोली, संग नाचे मतवाला।🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की…
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Tu hi Shiv hai

Tu hi Shiv hai

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October 6, 2025

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तू ही है, तू ही है… हर ओर मुझमें ही तू… तू ही शून्य, तू ही स्वर… तू ही धरा, तू ही…
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Hadtal Mrudung (हड़ताळ मृदंग ध्रगट ध्रगट)

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October 2, 2025

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धक-धक धधक ध्वनि धूम्रधार

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October 2, 2025

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मसाने में होली खेलें

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October 1, 2025

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धक-धक धधक ध्वनि धूम्रधार

धक-धक धधक ध्वनि धूम्रधार, धधक उठा यह धाम।ध्वस्त करो अब दुष्ट दलन, धीर धरो महाकाल॥”धधक धधक धधके दिशाएँ, धरा धधक धू-धू जले।ध्वस्त दंभ, ध्वस्त दानव, ध्वनि से गगन भी हिले॥धमक रहे शिव डमरू धारी, धक-धक कर चेतन करे।धक-धक कर गति भी रुके, धवल जटा जब चल पड़े॥”धक-धक धधक ध्वनि धूम्रधार, धधक उठा यह धाम।ध्वस्त करो अब दुष्ट दलन, धीर धरो महाकाल॥”
धरा ध्वस्त, नभ धूसरित, धूम्र हुआ संसार है।धारदार त्रिशूल धरा पर, धधक उठे संहार है॥ध्वजा उठाए, धीर शिव, धधक उठी जब आग है।धड़क उठे देव-दानव, ध्वस्त हुई अभाग है॥धधक-धधक कर चला समीरण, ध्वनि से गूंजे व्योम भी।धूल बने जब महाकाल के, ध्वस्त हुए सब दोष भी॥
“धक-धक धधक ध्वनि धूम्रधार, धधक उठा यह धाम।ध्वस्त करो अब दुष्ट दलन, धीर धरो महाकाल॥”
धक-धक धधक धधक शिव, धारा जब कंपाय है।धड़-धड़ धू-धू धूसरित, ध्वस्त होई अन्याय है॥ध्वनि शिव की धरा कंपाए, धूम्रभस्म जब काज है।धधक उठे तांडव ज्वाला, धीर बने सब लाज है॥धर्म ध्वजा पुनः लहराए, धैर्य धार शिव ध्यान में।धड़क उठा हर ह्रदय मनुज का, धरा पड़ी शिव पान में॥”धक-धक धधक ध्वनि धूम्रधार, धधक उठा यह धाम।ध्वस्त करो अब दुष्ट दलन, धीर धरो महाकाल॥”
धधक तांडव जब थमा, ध्वनि शांत बनी अब ध्यान में।धवल हुआ हर पाप सभी का, धरा गई अभिमान में॥धरा चरण में रखे कृपालु, धनी हुआ जो ध्यान करे।धीर बने जो शरण में आए, धवल दिशा का ज्ञान धरे॥धन्य हुआ वह मानव, जो धरा चरण शिव शंभु का।धूप बनी जो ह्रदय का अंध, धवल हुआ जब अंशु का॥
“धक-धक धधक ध्वनि धूम्रधार, धधक उठा यह धाम।ध्वस्त करो अब दुष्ट दलन, धीर धरो महाकाल॥””धक-धक धधक ध्वनि धूम्रधार, धधक उठा यह धाम।ध्वस्त करो अब दुष्ट दलन, धीर धरो महाकाल॥”

मसाने में होली खेलें

मसाने में होली खेलें

मसाने में होली खेलें, शिव डमरू वाला,
भूत-गणों की टोली, संग नाचे मतवाला।
🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
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श्मशान की राख लगाए, शंकर का रूप निराला,
त्रिशूल उठाए गूंजे, जयकारा डमरू वाला।
कभी तांडव, कभी मस्ती, कभी भस्म की बरसात,
भोले की टोली आई, छाए काशी में रंग हजार!
मसाने में होली खेलें, शिव डमरू वाला,
भूत-गणों की टोली, संग नाचे मतवाला।
🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
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भस्म में सजे भुजंगों की माला,
गूंजे गगन में जय शिवशंकर वाला!
बैरागी की टोली, नाच रही बम-बम,
नंदी भी झूमे, जब डमरू बजे दम-दम!
मसाने में होली खेलें, शिव डमरू वाला,
भूत-गणों की टोली, संग नाचे मतवाला।
🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
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कैलाश से उतर के आए महाकाल,
हर-हर महादेव से गूंजे हर गाल!
न कोई भेद, न कोई डर,
हर-हर महादेव से गूंजे काशी नगर!
मसाने में होली खेलें, शिव डमरू वाला,
भूत-गणों की टोली, संग नाचे मतवाला।
🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
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चिता की ज्वाला में उठे जो लपटें,
शिव के डमरू की ताल पे मटके!
भक्त भी झूमे, भगवान भी झूमे,
भंग की मस्ती में त्रिलोक भी झूमे!
मसाने में होली खेलें, शिव डमरू वाला,
भूत-गणों की टोली, संग नाचे मतवाला।
🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
🔱 बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
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भस्म रमाई, कंठ में विष धारा,
सबको तारण, शिव ही सहारा!
जो शिव को माने, वो कुछ न हारे,
मृत्यु भी डरे, जब महादेव पुकारे!
मसाने में होली खेलें, शिव डमरू वाला,
भूत-गणों की टोली, संग नाचे मतवाला।
बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!
बाबा विश्वनाथ की जय, काशी विश्वनाथ की जय!